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गुजरात हाई कोर्ट द्वारा मोदी सरनेम मामले मे दोषी करार दिए जाने पर कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इस मामले की शुरुआत तब हुई जब गुजरात, सूरत की सेशन कोर्ट द्वारा आपराधिक मानहानि के मामले में 23 मार्च 2023 को राहुल को दो साल की सजा सुनाई थी। जिसके बाद फैसले को चुनौती देते हुए वे गुजरात हाईकोर्ट गए थे, जहां भी उन्हे निराश होकर ही आना पड़ा क्योंकि 7 जुलाई 2023 को हाई कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिए जाने की सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

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मामले मे हाईकोर्ट की टिप्पणी कुछ इस प्रकार थी:- “इस केस के अलावा राहुल के खिलाफ कम से कम 10 केस पेंडिंग हैं। ऐसे में सूरत कोर्ट के फैसले में दखल देने की जरूरत नहीं है।” जिसपर कांग्रेस ने गुजरात हाईकोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हम अब सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।

हालांकि आभी तक सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई की कोई तारीख सामने नहीं आई है, अगर इस मामले मे राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलती है, तो उनकी संसद की सदस्यता बहाल हो सकती। जिसपर वे अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव 2024 लड़ पाएंगे। लेकिन अगर सुप्रीम कोर्ट भी सजा पर रोक लगाने से इनकार करता है तो वे अगले 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।

वहीं दूसरी तरफ, Rahul Gandhi के खिलाफ मानहानि की शिकायत करने वाले भाजपा विधायक पूर्णेश मोदी ने 12 जुलाई को ही सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दी थी। उन्होंने कोर्ट से अपील की थी कि इस मामले मे राहुल गांधी के पक्ष के साथ-साथ उनका पक्ष भी सुना जाए।

Rahul Gandhi ने जिस अध्यादेश को फाड़ा था वही बचा सकता था संसदगी:-

साल 2013 में जब UPA सरकार थी, तब सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था, कि सांसद हो या विधायक यदि उसे दो या उससे ज्यादा साल की सजा मिलती है, तो उसकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से खत्म हो जाएगी। जिसके खिलाफ तत्कालीन मनमोहन सरकार एक अध्यादेश लाई थी, ताकि सुप्रीम कोर्ट का फैसला निष्प्रभावी हो जाए। इसके साथ ही 24 सितंबर 2013 को कांग्रेस सरकार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन भी किया था। उसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी भी पहुंचे और कहा की – “ये अध्यादेश बकवास है और इसे फाड़कर फेंक देना चाहिए।” और उन्होंने इस अध्यादेश की कॉपी को प्रेस कॉन्फ्रेंस मे ही फाड़ दिया था। जिसके बाद मनमोहन सरकार ने यह अध्यादेश वापस ले लिया गया था।

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और समय का खेल देखिए जिस अध्यादेश को राहुल गांधी ने तब फाड़ कर फेंक दिया था आज वही अध्यादेश उन्हे इस सजा के खिलाफ संजीवनी बूटी प्रदान कर सकता था। अध्यादेश फाड़ते हुए राहुल गांधी ने कभी नहीं सोच होगा की भविष्य मे यही उनकी साँसदगी बचा सकता है। यदि वे ऐसा नहीं करते तो आज उनकी सदस्यता बची रहती और वे 2024 का लोकसभा चुनाव भी लड़ पाते।

ये हैं, वो दस मामले जो Rahul Gandhi पर मानहानि के तहत दर्ज हुए और चल रहे हैं:-

पहला मामला साल 2014 में Rahul Gandhi द्वारा संघ पर महात्मा गांधी की हत्या का आरोप लगाया गया था। जिसपर संघ के एक कार्यकर्ता ने राहुल गांधी पर आईपीसी की धारा 499 और 500 के तहत महाराष्ट्र के भिवंडी कोर्ट में मामला दर्ज कराया था। जोकि अभी भी चल रहा है।

फिर दूसरा मामला 2016 में भी राहुल के खिलाफ असम के गुवाहाटी में धारा 499 और 500 के तहत एक मानहानि का केस दर्ज हुआ था। जिसमे शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि, Rahul Gandhi ने एक बयान दिया था, कि 16वीं सदी के असम के वैष्णव मठ बरपेटा सतरा में संघ के सदस्यों ने उन्हें प्रवेश नहीं करने दिया। जिससे संघ की छवि को नुकसान पहुंचा है। यह मामला भी कोर्ट में लंबित पड़ा है।

फिर तीसरा मामला 2018 Rahul Gandhi के खिलाफ झारखंड की राजधानी रांची में दर्ज किया गया। यह मामला भी रांची की सब-डिविजनल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट में चल रहा है। इस केस में राहुल के उस बयान पर आपत्ति जताई गई है, जिसमें उन्होंने ‘मोदी चोर है’ कहा था।

फिर चौथा मामला 2018 Rahul Gandhi पर महाराष्ट्र में एक और मानहानि का केस दर्ज हुआ। यह मामला मझगांव स्थित शिवड़ी कोर्ट में अभी लंबित है इसमे भी धारा 499 और 500 के तहत मानहानि का केस दर्ज किया गया था। यह केस भी संघ के एक कार्यकर्ता द्वारा दायर किया गया था। जिसमे राहुल पर आरोप है कि, उन्होंने गौरी लंकेश की हत्या को और बीजेपी संघ की विचारधारा से जोड़ कर बताया था।

फिर पाँचवाँ मामला 2018 एडीसी बैंक के चेयरमैन अजय पटेल द्वारा अदालत में मानहानि का मामला दर्ज करवाया गया था। जिसमे Rahul Gandhi ने आरोप लगाया था कि, 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी के बाद अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक में मात्र पांच दिनों में ही 745.58 करोड़ रुपए के पुराने नोट बदले गए थे।आपको बता दें की इस बैंक के निदेशकों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हैं।

फिर छठा मामला 2017  बेंगलुरु में एक पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के मामले में RSS को कथित तौर पर जोड़ने के लिए भी Rahul Gandhi के खिलाफ मुंबई में मानहानि का मामला दर्ज करवाया गया था। जिसमे शिकायतकर्ता ने कहा कि आरोपियों के बयान लोगों की नजर में संघ की छवि खराब करने वाले हैं।

फिर सातवाँ मामला 2018 तब दर्ज हुआ जब राफेल फाइटर जेट सौदे पर राहुल ने बीजेपी का मजाक उड़ाया गया था और ट्वीट किया था जिसका कैप्शन उन्होंने लिखा- “द सैड ट्रुथ अबाउट इंडिया कमांडर इन थीफ” इस मामले में राहुल के खिलाफ एक गुड़गांव की एक कोर्ट में मानहानि का केस दर्ज किया गया।

फिर आठवाँ मामला 2019 में तब दर्ज हुआ जब जबलपुर में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर राहुल गांधी द्वारा हत्या का आरोप लगाया गया था। जिसको लेकर राहुल के खिलाफ अहमदाबाद कोर्ट में मानहानि का केस दर्ज करवाया गया।

फिर नौनवा मामला 2019 झारखंड में Rahul Gandhi पर तब दर्ज हुआ जब उन्होंने कहा था कि- “कांग्रेस भाजपा की तरफ से हत्यारे को पार्टी अध्यक्ष नहीं स्वीकारेगी” उनके इस बयान पर चाईबासा और रांची में मानहानि का केस दर्ज किया गया था। जो अभी तक चल रहा है।

फिर दसवां मामला 2022 में तब दर्ज हुआ जब Rahul Gandhi ने कहा था कि, “सावरकर ने आजादी से पहले अंग्रेजों से माफीनामे पर हस्ताक्षर किया।” जिसके बाद सावरकर के पोते विनायक सावरकर ने मुंबई के शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज करवाई थी।

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