नई दिल्ली,16 सितंबर: सरकार हर वर्ग के लिए आए दिन कुछ न कुछ बदलाव कानूनों में कर रही है जिसपर इस बार बच्चों के लिए जरूरी बदलाव किये गए है जिसमें अब टीवी पर किसी भी विज्ञापन या प्रमोशनल वीडियो में अगर बच्चों को भीख मांगते या कोई अभद्र भाषा का इस्तेमाल या व्यवहार करते या बोलते नहीं दिखाया जा सकेगा।

जिसको लेकर “केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण” ने देश के सभी टीवी चैनलों को ये दिशा- निर्देश जारी कर दिए हैं। जिसमें उन्हें उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत बच्चों को लेकर तय विभिन्न प्रावधानों का सख्ती से पालन करने को कहा है। यदि इसका उल्लंघन किया गया तो संबंधित चैनल पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत 24 जुलाई 2020 को उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण का गठन देशभर में झूठे एवं भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाने के उद्देश्य से किया गया था। जिसमे महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और कई अन्य स्वयंसेवी संस्थाओं ने फरवरी 2022 में इसी प्राधिकरण को सुझाव दिया था कि, बच्चों के संदर्भ में दिखाए जाने वाले विज्ञापनों पर भी जरूरी गाइडलाइन जारी की जानी चाहिए। इन्हीं जरूरी सुझावों पर ये दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। जिनमें साफ साफ कहा गया है कि-

1. टीवी चैनल पर किसी विज्ञापन में बच्चों को भीख मांगते नहीं दिखाया जाएगा।

2. ऐसा कोई विज्ञापन नहीं दिखाया जाएगा, जिसमें बच्चा अभ्रद्र व्यवहार कर रहा हो।

3. स्पेशल फूड सप्लीमेंट या एनर्जी ड्रिंक के विज्ञापन दिखाकर कद या एनर्जी बढ़ाने जैसे दावे वाले विज्ञापन नहीं दिखाए जाएंगे।

4. ऐसा विज्ञापन नहीं दिखा सकते जो उन्हें ऐसा उत्पाद खरीदने को प्रेरित करे कि अगर नहीं लिया तो मजाक उड़ाया जाएगा।

इसके अलावा उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने सभी निजी सैटेलाइट चैनलों को बच्चों के कार्यक्रमों व बच्चों के चैनलों पर जंकफूड के विज्ञापन नहीं दिखाने के निर्देश दिए हैं। ऐसे कोई भी विज्ञापन जिसे देखकर बच्चे उसे खाने को प्रेरित होते हैं। अगर वे इस निर्देश का उल्लंघन करते हैं तो इसे प्रशासन अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस मानेगा और संबंधित चैनल के खिलाफ जरूरी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

किस तरह से होगी चैनलों पर कार्रवाई?

यदि आपको लगता है कि कोई चैनल उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण दिशा-निर्देशों का पालन नहीं कर रहा है तो अवहेलना होने पर आप शिकायत उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण में कर सकते हैं। जिसपर पहले तो प्राधिकरण उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करेगा इसके साथ ही चैनल प्रबंधन को संबंधित विज्ञापन तुरंत हटाने का आदेश भी उपभोक्ता संरक्षण मंत्रालय जारी करेगा। यदि फिर भी विज्ञापन नहीं हटाए जाते तो प्राधिकरण उसे दोषी मानेगा जिसपर संबंधित चैनल पर 10 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

 

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