चंडीगढ़: बीते दिनों दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरिवल ने विडिओ शेयर करते हुए कहा था कि दिल्ली को साजिश के तहत डुबाया गया है इसमे हरियाणा का हाथ है। इस मामले में हरियाणा के CM Manohar Lal Khattar ने आम आदमी पार्टी को आंकड़ों सहित करारा जवाब दिया है। मुख्यमंत्री ने पलटवार करते हुए यहां तक बोल दिया कि आम आदमी पार्टी वालों को इतना तक नहीं पता कि बैराज क्या होता है और ये बांध से कैसे अलग होता है। अगर अज्ञानता का पुरस्कार किसी को देना चाहिए तो वह दिल्ली आम आदमी पार्टी के लोगों को देना चाहिए।

साथ ही उन्होंने कहा कि आपदा के दौरान राजनीतक भाषा बोलने का मेरा स्वभाव बिल्कुल नहीं है। मगर, जब सामने वाले ऐसी भाषा बोलते हैं तो, इसपर मुझे उसका जवाब जरूर देना पड़ेगा। और फिर मैं इस ढंग से जवाब दूंगा कि “अगर अज्ञानता का पुरस्कार किसी को देना हो तो दिल्ली की आम आदमी पार्टी के लोगों को देना चाहिए”

ऐसा मै इसलिए कह रहा हूँ, क्योंकि इनको इतना तक नहीं पता कि हथिनी कुंड बैराज असल में क्या है। बैराज में एक नदी होती है, उसकी साइड में नहरें निकाली जाती हैं। नदी पानी के बहने का प्राकृतिक स्रोत है। जबकि नहरें सिंचाई विभाग की आवश्यकता के हिसाब से चलाई जाती हैं

इसके बगल से दो नहरे निकली गई हैं, पश्चिमी यमुना और पूर्वी यमुना नहर। जिसमे पूर्वी यमुना की कुल क्षमता 5 हजार क्यूसेक है। जबकि पश्चिमी की 18 हजार क्यूसेक है। और पानी जब भी 1 लाख क्यूसेक तक होता है, तब तक इसमे से 23 हजार क्यूसेक दोनों नहरों में निकालते हैं, और बाकी यमुना में छोड़ा जाता है।।

और जैसे ही पानी 1 लाख क्यूसेक को पर करता है तभी  CWC का निर्देश हैं कि दोनों नहरों का पानी तुरंत बंद कर दिया जाना जाए। जिसकी वजह है कि इतने पानी बाद नहरों में प्रेशर के साथ पत्थर आते हैं जोकि नहर के गेट को नुकसान पहुंचा सकते है। और वह पानी मैदानी इलाकों में फैल तबाही मचा सकता है। पानी का नेचुरल सोर्स नदी है, तो अधिक पानी उसी में सारी में जाना चाहिए।

गौरतलब है कि 11 अप्रैल को यमुना में 3 लाख 69 हजार क्यूसेक पानी था जबकि बैराज की कैपेसिटी सिर्फ एक लाख क्यूसेक की है, बाकी यमुना में ही छोड़ जाता है। इसमे आम आदमी वाले कह रहे कि, पानी क्यों नहीं छोड़ा। पहली बात तो ये कि नहरों में पानी नहीं छोड़ा जा सकता। चलो उनमे छोड़ भी देते तो उनमें 23 हजार क्यूसेक ही जाता। फिर 3 लाख 46 हजार क्यूसेक पानी बचता। अब उस पानी को तो बैराज मे रोक नहीं सकते थे अंत में वह पानी यमुना में ही जाता। दिल्ली डूबने का अगर ये लोग बैराज से पानी छोड़ने को बता रहे हैं तो ये इनकी नासमझी है।

 

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