नई दिल्ली,  23 सितंबर : भारत के Chandrayaan 3 मिशन पर गए विक्रम लेंडर और रोवर प्रज्ञान को स्लीप मोड में गए हुए काफी समय बीत चुका है इसके साथ ही चंद्रमा पर सूर्योदय हुए तीन दिन बीत भी चुके हैं, लेकिन अभी तक चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर अभी तक स्लीप मोड में हैं, इसरो द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार उम्मीद की जा रही थी कि, शुक्रवार को दोनों को फिर से जगाया जा सकता हैं।

गौतलब है कि, दोनों मॉड्यूल्स को इस महीने की शुरुआत में चांद पर रात होने के चलते स्लीप मोड में डाल दिया गया था और की उम्मीद की जा रही थी कि, जब चांद पर फिर से उजाला होगा तो दोनों सूर्य की रोशनी से चार्ज होकर फिर से पृथ्वी पर स्थित इसरो कमांड सेंटर से संपर्क स्थापित के सिग्नल भेजने लगेंगे। परंतु किन्ही अज्ञात कारणों की वजह से शनिवार रात तक ऐसा नहीं हो सका है।

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इसरो चीफ एस. सोमनाथ

इस मामले पर इसरो के चेयरमैन एस. सोमनाथ ने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ को दिए साक्षात्कार में बताया कि “अभी तक हमे कोई भी सिग्नल नहीं मिला है, लेकिन मैं यह नहीं कह सकता कि सिग्नल आगे भी नहीं आएंगे। हम पूरे लूनर डे यानि कि अगले 14 दिनों तक इंतजार करेंगे, इसी अवधि तक सूर्य की रोशनी लगातार पड़ती रहेगी जिसका साफ मतलब है कि तापमान में बढ़ोतरी होगी।”

उन्होंने आगे बताया कि “जब तक तापमान बढ़ रहा है तब तक अंदर सिस्टम के गर्म होने की संभावना है। इसलिए उमीद है कि सिस्टम 14वें दिन भी जाग सकते हैं, लेकिन यह कब हो सकता है इसकी सटीक जानकारी देने करने का कोई तरीका नहीं है।”

 

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इसरो चीफ ने आगे कहा कि हमारे द्वारा किए गए कई प्रयोगों ने हमें डेटा दिया है, लेकिन यह समय के साथ बदल सकता है। उदाहरण के लिए, चाएसटीई (चांद का सरफेस थर्मो फिजिकल एक्सपेरिमेंट) को एक नए स्थान पर रखा जा सकता है। यदि हम एक और “हॉप” करते हैं तो हम किसी अन्य स्थान से एक नया डेटासेट प्राप्त कर सकते हैं, जो अच्छा है। उन्होंने कहा कि यहां तक कि रेडियो एनाटॉमी ऑफ मून बाउंड हाइपरसेंसिटिव आयनोस्फीयर और एटमॉस्फियर को भी एक अलग स्थान से चंद्रमा की जांच करने से लाभ होगा और जहां तक अन्य पेलोड जाते हैं, इसका फायदा एक अलग समय से डेटा प्राप्त करने में होगा।

आपको ज्ञात हो कि, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख केंद्रों में से एक अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र के निदेशक ने पहले भी कहा था कि चंद्रमा पर सूर्योदय के कारण सौर ऊर्जा से संचालित लैंडर और रोवर के चार्ज होते ही सिग्नल आ जाएंगे। लेकिन, अभी तक कोई सिग्नल नहीं आया है जबकि लगातार चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान से संपर्क स्थापित करने की कोशिशें की जा रही हैं।

वैज्ञानिक देसाई ने कहा था कि फिर से एक्टिव होने के 50-50 चांसेस हैं। यदि इलेक्ट्रॉनिक्स ठंडे तापमान से बचे रहते हैं तो हमें सिग्नल प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा, “अन्यथा, मिशन पहले ही अपना काम कर चुका है।” वैज्ञानिक ने यह भी कहा कि यदि लैंडर और रोवर को फिर से जगाया जाता है, तो चंद्रमा की सतह पर प्रयोग जारी रहेंगे।

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