Aditya L1 Mission,31 अगस्त: इसरो के चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के बाद अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) फिर से इतिहास रचने को तैयार है इस बार इसकी की नजरें सूर्य पर हैं। जिसके लिए इसरो दो दिन बाद एक और ऐतिहासिक उड़ान भरने के लिए तैयार है। इस बार यह मिशन सूर्य का अध्ययन करने के लिए रवाना होगा जो दो सितंबर को दोपहर 11 बजकर 50 मिनट पर श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से Aditya L1 Mission को लांच किया जाएगा। जिसकी पुष्टि इसरो ने बुधवार को कर दी और साथ ही बताया कि लांचिंग का रिहर्सल और राकेट की आंतरिक पड़ताल पूरी हो चुकी है। इसरो का इस अभियान के जरिये एक वेधशाला भेजने का प्लान है, जो सूर्य का अध्ययन करेगा।

Aditya L1 Mission अंतरिक्ष यान को सूर्य के कोरोना के दूरस्थ अवलोकन और एल। (सूर्य-पृथ्वी लैग्रेजियन बिंदु) पर सौर हवा का वास्तविक अध्ययन करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह स्थान पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर है। मिशन को लैग्रेजियन बिंदु-1 (एला) तक पहुंचने में करीब चार महीने का समय लगेगा। लैग्रेजियन बिंदु-1 वह स्थान है, जहां सूर्य पीएसएलवी-सी57 राकेट से Aditya L1 Mission के लांच की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।

इसरो का यह मिशन सूर्य के अध्ययन के लिए भारत का पहला समर्पित मिशन है, जिसे इसरो ऐसे समय अंजाम देने जा रहा है, जब हाल ही में इसरो ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 की साफ्ट लैंडिंग कराकर देश का  सर गर्व ऊंचा कर दिया है इसी वजह से पूरा देश भी इसरो के इस मिशन के लिए उत्साहित है।

Aditya L1 Mission के लॉन्च से पहले इसके पूर्वाभ्यास और राकेट की आंतरिक पड़ताल पूरी हो गई है। आदित्य- एल 1 मिशन का उद्देश्य ‘एल 1  के चारों ओर की कक्षा से सूर्य का अध्ययन करना है। इसमें विभिन्न तरंग बैंडों में सूर्य के फोटोस्फेयर, क्रोमोस्फेयर और सबसे बाहरी परत कोरोना का निरीक्षण करने के लिए सात पेलोड लगे होंगे।

इसरो के एक अधिकारी ने कहा, Aditya L1 Mission राष्ट्रीय संस्थानों की भागीदारी वाला पूर्णतः स्वदेशी प्रयास है। आदित्य-एल1 यूवी पेलोड का उपयोग करके कोरोना तथा क्रोमोस्फीयर का और एक्स-रे पेलोड का उपयोग करके सूर्य की लपटों का अध्ययन कर सकता है। पार्टिकिल डिटेक्टर और मैग्नेटोमीटर पेलोड आवेशित कणों और चुंबकीय क्षेत्र के बारे में जानकारी प्रदान कर पृथ्वी पर इसरो को भेजेगा।

 

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