भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था जो की अलग-अलग नियमों के बीच बिखरी हुई है। आखिरकार उसे अब एक नियामक के दायरे में लाने की प्रक्रिया शुरू की जा है, जिसके तहत एक प्रस्तावित योजना ने रफ्तार पकड़ी है जिसके तहत भारतीय उच्च शिक्षा आयोग जल्द ही अलग अलग उच्च शिक्षण संस्थानों को एक ही नियम के अंतरगर्त लाया जाएगा।

शिक्षा मंत्रालय ने फिलहाल इससे जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां पूरी कर ली है, इसके साथ ही दायरे में आईआईटी, एनआईटी, ट्रिपल ईआईटी और केंद्रीय विश्वविद्यालय सहित राष्ट्रीय उच्च शिक्षा के सभी राष्ट्रीय महत्वपूर्ण के सभीउचच शिक्षण संस्थानों को लाने का प्रस्ताव है, ये सभी संस्थान अभी स्वायत्त संस्थान के रूप में कार्य करते हैं।

वहीं इस व्यवस्था से कानून व चिकित्सा से जुड़े उच्च शिक्षण संस्थानों को अलग रखा गया है। शिक्षा मंत्रालय भारतीय उच्च शिक्षा आयोग के इसके गठन की तैयारी पहले ही जब नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत के आने के बाद शुरू कर दी थी, जिसमे एक मसौदा भी तैयार किया गया था।

हालांकि इस प्रस्ताव पर जितनी रफ्तार से काम किया जाना चाहिए था उतनी रफ्तार नहीं आ पाई और न ही इसका गठन हो पाया। परंतु अब इससे जुड़े प्रस्ताव को लंबे अंतराल के बाद अंतिम रूप दिया जा रहा है और माना जा रहा है कि, इससे जुड़े विधेयक को संसद के मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है। फिलहाल उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मौजूदा समय में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यूजीसी अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद एआईसीटी सहित करीब 14 नियामक काम करते हैं।

जिसमे शिक्षा कौशल विकास से जुड़ा शिक्षा परिषद, आर्किटेक्चर शिक्षा परिषद यदि शामिल है, ऐसे में एक संस्थान में अलग-अलग को संचालित करने के लिए अभी इन सभी नियमों के चक्कर लगाने पड़ते हैं इन सभी को अपने-अपने अलग-अलग भी होते हैं शिक्षा में सुधार करते हुए समूचे उच्च शिक्षा को एक नियामक के दायरे में लाने की तैयारी जिसमे आयोग के दायरे में काम करेगी 4 संस्थाएं।

 

अधिक खबरों के लिए बने रहे हरियाणा की ख़बर के साथ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *