नई दिल्ली,20 सितंबर : समाचार एजेंसी एएनआई के हाल ही में किये गए ट्वीट मुताबिक, सभी सांसदों को संविधान की जो कॉपी दी गईं, वे 18 सितंबर को ही संसद पहुंचा दी गई थीं। जिसपर सवाल उठाते हुए अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “संविधान की जो नई प्रतियां आज हमें दी गईं, जिन्हें हम अपने हाथों में पकड़कर नए संसद भवन में प्रवेश कर गए। इसकी प्रस्तावना में ‘सोशलिस्ट सेक्युलर’ शब्द नहीं है।

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उन्होंने आगे कहा “हम जानते हैं कि ये शब्द 1976 में एक संशोधन के बाद जोड़े गए थे, लेकिन अगर आज कोई हमें संविधान दे और उसमें से ये शब्द गायब हों, तो यह चिंता का विषय है”

 

बीते दिन नई संसद में यह सब घटित हुआ-

सभी सांसदों ने नए संसद भवन में प्रवेश किया जिसके बाद लोकसभा कार्यवाही की शुरुआत ही महिला आरक्षण बिल के साथ शुरू हुई। सबसे पहले लोकसभा में इस विधेयक को पेश करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस बिल को अब “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के नाम से जाना जाएगा। जिसके बाद विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी बोलने के लिए खड़े हुए तो उन्होंने कहा कि इस बिल को कांग्रेस सरकार के दौरान पेश किया गया था और ये लोकसभा में पारित हो चुका है जबकि राज्यसभा में अटक गया था।

जिसको लेकर सत्ता पक्ष के सांसदों ने आपत्ति जताई। फिर अधीर रंजन चौधरी ने पीएम मोदी से कहा कि “सदन में किसका क्या विचार है ये उसके व्यवहार से पता चलेगा, आप ही देखिए इन लोगों को ये तो आपकी बात का भी सम्मान नहीं कर रहे हैं,” इस तरह का व्यवहार तो सीधे-सीधे प्रधानमंत्री का अपमान है।

अधीर रंजन के सवाल पर कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा, ‘जब संविधान अस्तित्व में आया, तब समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्द नहीं थे। ये शब्द संविधान के 42वें संशोधन में जोड़े गए।’

 

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