नई दिल्ली, 16 सितंबर: भारत सरकार द्वारा हाल ही में एक देश-एक चुनाव के लिए चर्चा शुरू कर दी गयी है। जिसको लेकर कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा साफ़ कर दिया गया है कि, एक देश-एक चुनाव के साथ ही नए संविधान के लिए शुरू की गई चर्चा एक दुर्भावनापूर्ण कदम है। साथ ही उसने संविधान के मूल ढांचे में बदलाव के किसी भी प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है।

इसके साथ ही जातीय जनगणना की आवाज बुलंद करते हुए पार्टी ने एससी- एसटी और ओबीसी के आरक्षण की मौजूदा ऊपरी सीमा में और बड़ौतरी करने की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने संसद के विशेष सत्र में संसद-विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण देने का विधेयक पारित करने की आवाज उठाई है।

विपक्ष के नए गठबंधन आइएनडीआइए पर मुहर लगाते हुए कांग्रेस कार्यसमिति ने देश में विभाजनकारी राजनीति को परास्त कर इस पहल को चुनावी सफलता में तब्दील करने के लिए अपना संकल्प फिर से दोहराया है। कांग्रेस की शीर्ष नीति निर्धारण इकाई सीडब्ल्यूसी की पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में यहां शुरू हुई पहली बैठक के दौरान प्रस्ताव पारित कर इन अहम मुद्दों पर कांग्रेस ने अपना दृष्टिकोण साफ कर दिया।

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ पार्टी के सभी प्रमुख वरिष्ठ नेताओं ने करीब पांच घंटे की चर्चा के बाद एक देश-एक चुनाव से लेकर सियासी विमर्श पर छाए तमाम प्रमुख मुद्दों पर पार्टी की राजनीतिक लाइन खींच दी। आइएनडीआइए के रूप में सामने आई विपक्षी एकता की पहल का स्वागत करते हुए कार्यसमिति ने कहा कि प्रधानमंत्री और भाजपा इससे काफी बौखलाए हुए हैं।

आइएनडीआइए की पहल को वैचारिक और चुनावी रूप से सफल बनाने के लिए कांग्रेस अपने संकल्प को दोहराती है ताकि हमारा देश विभाजनकारी और ध्रुवीकरण की राजनीति से मुक्त हो। सामाजिक- समानता और न्याय में विश्वास रखने वाली ताकतों को मजबूती मिले और केंद्र में जनता को एक संवेदनशील, पारदर्शी और जवाबदेह सरकार मिले।

 

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