नई दिल्ली,19 सितंबर (एएनआई): संसद के विशेष सत्र के लिए महिला आरक्षण विधेयक (Women Reservation Bill) को कैबिनेट से मंजूरी मिल जाने पर जब काँग्रेस कि पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी से पूछा गया तो उनका जवाब कुछ इस प्रकार था  “इसके बारे में क्या? यह हमारा है। अपना हैं” लोकसभा और राज्यसभा की ऐतिहासिक संयुक्त बैठक के लिए संसद में प्रवेश करते समय मीडियाकर्मियों को महिला आरक्षण बिल पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की।
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आपको बता दें कि मोदी सरकार ने संसद का विशेष सत्र बुलाने  का ऐलान किया है इसी को लेकर दोनों सदन नवनिर्मित संसद भवन में अपना पहला सत्र बुला रहे हैं। सूत्रों के हवाले से या रही खबर के मुताबिक, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सोमवार देर रात को महिला आरक्षण विधेयक को मंजूरी दे दी, जिसमें प्रस्तावित लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीट को महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है।

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आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सोमवार को हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक में महिला आरक्षण विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी है। जिसको लेकर कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने आज कहा, “हम चाहते हैं कि महिला आरक्षण विधेयक जल्द से जल्द लाया और पारित किया जाए। महिला आरक्षण विधेयक की मांग यूपीए और हमारी नेता सोनिया गांधी ने शुरू की थी। इसमें इतना समय लग गया, लेकिन अगर इसे पेश किया जाए तो खुश होइए।”
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इससे पहले सोमवार को कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा था कि पार्टी लंबे समय से संविधान 108वें संशोधन विधेयक, 2008 विधेयक को लागू करने की मांग कर रही है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “कांग्रेस पार्टी लंबे समय से महिला आरक्षण लागू करने की मांग कर रही है। हम कथित तौर पर आने वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले का स्वागत करते हैं और विधेयक के विवरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि विशेष सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में इस पर गहन चर्चा की जा सकती थी और पर्दे के पीछे की राजनीति के बजाय आम सहमति बनाई जा सकती थी.

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आरक्षित सीटों का आवंटन संसद द्वारा निर्धारित प्राधिकारी द्वारा निर्धारित किया जाएगा। लोकसभा और विधानसभाओं में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों की कुल संख्या का एक तिहाई उन समूहों की महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाएगा। इस संशोधन अधिनियम के लागू होने के 15 वर्ष बाद महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण समाप्त हो जाएगा। 2010 में राज्यसभा ने इस विधेयक को पारित कर दिया था लेकिन लोकसभा में पारित नहीं हो पाने के कारण यह विधेयक रद्द हो गया।

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