नई दिल्ली 19,सितंबर : मोदी सरकार ने संसद का विशेष सत्र बुलाया है जिसके कयास लगाए जा रहे थे कि संसद के विशेष सत्र बुलाने के पीछे क्या वजह हो सकती है इसी बीच अभी एक जानकारी सूत्रों के हवाले से अहम जानकारी सामने या रही है कि कैबिनेट की अहम बैठक हुई है जिसमें आखिरकार महिला आरक्षण बिल को मंजूरी मिल गई है।

इस बिल को लेकर जब संसद का विशेष सत्र बुलाया तब कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन तमाम कयासों को दरकिनार करते हुए केंद्रीय कैबिनेट ने आखिरकार इस बिल को मंजूरी दे दी। अब इस मंजूरी के बाद महिला आरक्षण बिल को लोकसभा में पेश किया जाएगा।

आखिर क्या है महिला आरक्षण बिल ?

मोदी सरकार द्वारा पेश किया जाने वाला महिला आरक्षण विधेयक मुख्यत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी या एक तिहाई सीटों का आरक्षण सुनिश्चित करने का प्रस्ताव है। इस विधेयक में प्रस्तावित 33 फीसदी कोटे के भीतर एससी, एसटी और एंग्लो-इंडियन के लिए उप-आरक्षण का भी प्रस्ताव शामिल है।

इसमने प्रस्तावित है कि, प्रत्येक आम चुनाव के बाद आरक्षित सीटों को रोटेट किया जाना चाहिए। तथा आरक्षित सीटें राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में रोटेशन द्वारा आवंटित की जा सकती हैं। इस संशोधन अधिनियम के लागू होने के 15 साल बाद महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण समाप्त हो जाएगा।

 

पिछले 27 सालों से लंबित पड़ा है बिल-

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महिला आरक्षण बिल पिछले करीब 27 सालों से लंबित था जो अब संसद के पटल पर आएगा। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या 15 फीसदी से भी कम है, जबकि राज्य विधानसभा में उनका प्रतिनिधित्व 10 फीसदी से भी कम है।

इस मुद्दे पर आखिरी बार साल 2010 में कदम उठाया गया था, जब राज्यसभा ने हंगामे के बीच इस बिल को पास तो कर दिया था परंतु मार्शलों ने उन सांसदों को बाहर कर दिया था, जिन्होंने महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण का विरोध किया था। इतने भारी विरोध को देखते हुए यह विधेयक रद्द हो गया क्योंकि लोकसभा से पारित नहीं हो सका था।

 

बीजेपी और कांग्रेस ने दिया अपना समर्थन-

पहले बीजेपी और कांग्रेस दोनों दलों ने इसका समर्थन किया है। हालांकि कुछ अन्य दलों ने महिला कोटा को पूरी तरह से विरोध न करके इसके भीतर ओबीसी आरक्षण की कुछ मांगों को लेकर इसका विरोध किया। लेकिन खबर या रही है कि अब एक बार फिर कई दलों ने इस विशेष सत्र में महिला आरक्षण विधेयक लाने और पारित करने की जोरदार वकालत की, लेकिन सरकार की ओर से कहा गया है कि उचित समय पर उचित निर्णय लिया जाएगा।

 

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