नई दिल्ली, 20सितंबर; Women Reservation Bill: देश का नया संसद आज एक ऐतिहासिक पल का गवाह बना जिसमें वर्षों से लंबित नारीशक्ति वंदन बिल (Women Reservation Bill) आखिर पास हो ही गया। इस विधेयक का देश के लगभग दलों ने खुलकर समर्थन किया जिसमने इसके पक्ष में कुल 454 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में मात्र 2 वोट पड़े जिसके हिसाब से पक्ष की संख्या कुल संख्या का दो तिहाई आंकड़ा है।

नई बनाई गई संसद में पारंपरिक पर्चियों के जरिए इसकी वोटिंग हुई। आपको बता दें कि मोदी सरकार द्वारा बुलाए गए संसद के पांच दिनों के विशेष सत्र में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इसे सदन में पेश किया था। अगर इस विधेयक की बात करें तो इसमें देश कि सभी विधानसभाओं और लोकसभा में एक तिहाई सीटों को महिलाओं के लिए आरक्षित रखने का प्रावधान है। मोदी कैबिनेट से इस विधेयक को सोमवार को मंजूरी मिली थी, जिसके बाद इसे विशेष सत्र के दूसरे ही दिन लोकसभा में पेश कर दिया गया था।

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राज्यसभा में किया जाएगा पेश-

इसके लोकसभा से पास होने के बाद अब इसे गुरुवार को राज्यसभा में पेश किया जाएगा जहां इसपर फिरसे चर्चा की जाएगी। जिसको लेकर राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने सदन में इसकी घोषणा करते हुए कहा कि सदन में विभिन्न दलों के नेताओं के साथ विचार-विमर्श के बाद ही यह तय किया गया कि संविधान 128वां संशोधन विधेयक, 2023 पर बृहस्पतिवार को यहां चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि लोकसभा में विधेयक के पारित होने के बाद ही इसे उच्च सदन में चर्चा एवं पारित किए जाने के लिए पेश किया जाएगा। इस विधेयक पर चर्चा के लिए साढ़े सात घंटे का समय तय किया गया है।

महिला आरक्षण विधेयक पर लोकसभा में कई घंटों तक चली चर्चा का में जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि “महिला आरक्षण विधेयक लाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मातृशक्ति को सम्मानित किया है। इसके पारित होने से नए युग की शुरुआत होगी। प्रधानमंत्री मोदी ने जी20 में महिलाओं के नेतृत्व वाली प्रगति का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। महिला सशक्तीकरण दूसरे दलों के लिए राजनैतिक मुद्दा होगा, लेकिन उनकी पार्टी और पीएम मोदी के लिए यह राजनैतिक नहीं, बल्कि मान्यता का मामला है।”

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विपक्ष ने भी किया समर्थन-

विपक्ष ने भी इस विधेयक को लेकर खुलकर समर्थन किया है जिसमें कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष व सांसद राहुल गांधी ने भी बिल का समर्थन किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इसमें अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) की महिलाओं के लिए अलग आरक्षण का प्रावधान होना चाहिए क्योंकि इसके बिना यह विधेयक अधूरा है।  इसके अलावा उन्होंने सरकार से आग्रह भी किया कि तत्काल जातीय जनगणना कराई जाए और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार के समय हुई जातीय जनगणना के आंकड़े जारी किए जाएं। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सत्तापक्ष जातीय जनगणना की मांग से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहा है।

जल्द से जल्द लागू किया जाए बिल-
जहां कॉंग्रेस ने इसका समर्थन किया है वहीं, दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने सरकार से आग्रह भी किया कि ‘नारीशक्ति वंदन विधेयक’ के कानून बनने के साथ ही इसे जल्द से जल्द भी लागू किया जाए क्योंकि इसे लागू करने में देरी से भारत की महिलाओं के साथ घोर नाइंसाफी होगी।

इसके अलावा चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने महिला आरक्षण विधेयक को ‘अपना विधेयक’ बताने पर कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी के दावे पर निशाना साधते हुए बुधवार को लोकसभा में कहा कि कुछ लोग इस विधेयक को ‘अपना’ बताकर श्रेय लेने का प्रयास कर रहे हैं।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि “विपक्ष देशवासियों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष का नाम लिये बिना कहा कि सदन में कहा गया कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने 2010 में विधेयक पेश किया था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ”सफलता के कई रहनुमा होते हैं, लेकिन विफलता का कोई नाम लेने वाला नहीं होता है। इसलिए जब विधेयक लाया गया, तो कुछ लोगों ने इसे ‘अपना विधेयक’ बताया।” 

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